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Motivational Poem In Hindi | प्रेरक कविता।

आपको प्रेरित करने और आपके दिन को शक्ति देने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रेरक कविता। अपने आप को सकारात्मक ऊर्जा से भरें और अपनी जीवन शैली को बढ़ावा दें। Motivational Poem In Hindi | प्रेरक कविता।

1) Motivational Poem On Home-Maker

रसायनशास्त्र से शायद ना पड़ा हो पाला,
पर सारा रसोईघर प्रयोगशाला!
दूध में साइटरीक एसिड डालकर पनीर बनाना…, या सोडा बाईकार्ब से केक फूलाना!
चम्मच से सोडियम क्लोराइड का सही अनुपात तोलती रोज़ कितने ही प्रयोग कर डालती हैं!
पर खुद को कोई वैज्ञानिक नहीं बस गृहिणी ही मानती हैं।

Motivational Poem In Hindi

रसोई गैस की बढ़ें कीमतें या सब्ज़ियों के बढ़ें भाव,
पैट्रोल डीज़ल महँगा हो या तेल में आए उछाल,
घर के बिगड़े हुए बजट को झट से सम्हालती हैं!
अर्थशास्त्री होकर भी ख़ुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

मसालों के नाम पर भर रखा आयुर्वेद का ख़ज़ाना,
गमलों में उगा रखे हैं तुलसी गिलोय करीपत्ता!
छोटी-मोटी बीमारियों को
काढ़े से भगाना जानती हैं!
पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

सुंदर रंगोली और मेंहँदी में
नज़र आती इनकी चित्रकारी,
सुव्यवस्थित घर में झलकती है इनकी कलाकारी,
ढोलक की थाप पर गीत गाती नाचती हैं,
कितनी ही कलाएँ जानती हैं! पर ख़ुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

समाजशास्त्र ना पढ़ा हो शायद…,
पर इतना पता है कि
परिवार समाज की इकाई है!
परिवार को उन्नत कर
समाज की उन्नति में
पूरा योगदान डालती हैं!
पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

मनो वैज्ञानिक भले ही ना हों…,
पर घर में सबका मन पढ़ लेती हैं!
रिश्तों के उलझे धागों को
सुलझाना खूब जानती हैं!
पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

योग ध्यान के लिए समय नहीं है ऐसा अक्सर कहती हैं,
और प्रार्थना में ध्यान लगाकर घर की कुशलता मांगती हैं!
ख़ुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

ये गृहिणीयां सच में महान हैं,
कितने गुणों की खान हैं!
सर्वगुण सम्पन्न हो कर भी अहंकार नहीं पालती हैं!
ख़ुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।

Motivational Poem In Hindi

2) Motivational Poem On Love

काश! तेरा-मेरा साथ होता,
फिर छिपा ना दिल मे कोई राज होता।

चिढ़ाती रहती है शाम,
तेरे संग न होने पर,
राते भी रोती है मेरे सो जाने पर,
ये शाम भी खूब होती, रात को भी लिहाज होता,
काश! तेरा-मेरा साथ होता,
फिर छिपा ना दिल मे कोई राज होता।

आंखे भी भर आती है,
अकेले कदमो को चलते देखकर,
रूह भी बिलख उठती है,
अकेली परछाई देखकर,
रास्तो के साथ मंजिलों को भी नाज होता,
काश! तेरा-मेरा साथ होता,
फिर छिपा ना दिल मे कोई राज होता।

Love Quotes In Hindi Sad

बदल गया है वो सपना,
जो अरसो पहले देखा था,
संभलता नहीं वो लम्हा,
जो बरसो पहले बीता था,
खैरात ना होती साँसे, जो जिंदगी से वादा होता,
काश! तेरा-मेरा साथ होता,
फिर छिपा ना दिल मे कोई राज होता।

गर जमाने को ही फिक्र है,
वो जलकर राख होता क्यों नहीं?
बंधा है कोई बंधन,
तो वो खुलता क्यों नहीं?
साहिर की महफ़िल में मयखाना ना होता,
छत्तर का दिल! दिल होता दिमाग ना होता,
काश! तेरा-मेरा साथ होता,
फिर छिपा ना दिल मे कोई राज होता,

जब तक को हैं, तब तक रोना हैं।
फ़िर बाद में मौज मस्ती तो होना हैं।
यही तो महामारी कोरोना हैं।

डरना नहीं, पर संभल कर चलना हैं।
साबुन से हाथ 20 सेकंड रगड़ना हैं।
फालतू का सेर सपाटा बंद करना हैं।
फ़िर बाद में मौज मस्ती तो होना हैं।
यही तो महामारी कोरोना हैं।

Hindi Poem on corona

स्वच्छता का ध्यान थोड़ा ज्यादा रखना हैं।
इम्यूनिटी के लिए काढ़ा जरूर पीना हैं।
2 गज की दूरी हो चली ज़रूरी हैं।
हाई! हेल्लो! त्याग कर राम राम पर लौटना हैं।
फ़िर बाद में मौज मस्ती तो होना हैं।
यही तो महामारी कोरोना हैं।

प्रधानमंत्री ने दिए थे कुच्छ टास्क।
हाथ में सेनेटाइजर और मुँह पर ज़रूरी हैं मास्क।
हो बुख़ार खांसी तो गरम पानी पीना हैं।
फ़िर बाद में मौज मस्ती तो होना हैं।
यही तो महामारी कोरोना हैं।

Hindi Poem on corona

भारत का बूढ़ा भी तो अभी यंग हैं।
डरने की बात नहीं, सरकार अपने संग हैं।
डॉक्टर भी तो इलाज़ में मग्न हैं
उत्साह की बाक़ी अभी उमंग हैं।
फ़िर बाद में मौज मस्ती तो होना हैं।
यही तो महामारी कोरोना हैं।

एक इशारा तो दे जिंदगी

एक इशारा तो दे जिंदगी,
एक सहारा तो दे जिंदगी।
मुझे जीने का तोहफा तो दे ही दिया,
तरक्की का अंदाज भी दे जिंदगी।

Story of Kashmir in Hindi

बड़े नाज से अपनी दास्तां लिख सकूं,
ऐसा सहारा तो दे जिंदगी।
बड़े फक्र से अपना पैगाम छोड़ सकूं,
ऐसा फसाना तो दे जिंदगी।

पार कर सकूं तेरी हर आजमाइश को,
ऐसा किनारा तो दे जिंदगी।
तेरे कायदों को कायम रख सकूं,
ऐसा जमाना तो दे जिंदगी।

अपनी ख्वाहिशों की खाक छान सकूं,
वो तारीख और तजुर्बा तो दे जिंदगी।
एक इशारा तो दे जिंदगी,
एक सहारा तो दे जिंदगी।.

जिसमे दीखता इस जीवन का अक्स, वो ममतामयी दर्पण है माँ,
बच्चों की खुशियों के खातिर, ख़ुशी से करती जीवन अर्पण है माँ।

कभी स्नेह की ज़िंदा मूरत, तो कभी दया की सर्जन है माँ,
कभी शिशु की सारी दुनिया, तो कभी ईश्वर का दर्शन है माँ।

रोते शिशु को सिखाती है हँसना, जीवन की पहली गुरु है माँ,
सोती फिर उस मुस्कान को देख, उसी मुस्कान को देख, दिन करती शुरू है माँ।

माँ पर कविता
शिशु को रखती फूल के जैसे, उसकी बाग़बानी करती माली है माँ,
भरी हुई है भावों से निरंतर, फिर भी क्रोध-द्वेष से खाली है माँ।

जो होती है निराशाओं की शाम कभी, तो आशाओं की भोर है माँ,
जो संभाले भटकने से हर डगर पर, वो हौसलों की डोर है माँ।

अगर दुनिया है धूप घनेरी, तो शीतलमय छाँव है माँ,
अगर संसार है समन्दर तूफानी, तो उनसे लड़ती नाव है माँ।

जो बचाती दुनिया की बुरी नज़रों से, माथे का वो काजल है माँ,
जिसकी पनाह में मिलता सुकून, वात्सल्य का वो आँचल है माँ।

कितनी भी हो विकट परेशानी, हर समस्या का सीधा हल है माँ,
नहीं व्यक्त कर सकते शब्द जिसे, ईश्वर की लिखी वो ग़ज़ल है माँ।

छोड़ो आस अब शस्त्र उठा लो,
स्वयं ही अपनी लाज बचा लो।
पासे दिखाए जब हस्ता शकुनि,
मस्तक सब झुक जाएंगे।
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

Hindi Poem on women empowerment

कब तक सहारा मांगोगी तुम,
बिके हुए अखबारों से,?
केसी रक्षा माँग रहीं तुम,
दुःशासन की सरकार से?
स्वयं जो लज्जा हीन बैठे,
वे क्या लाज बचाएंगे?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

द्वापरयुग का अंधा राजा,
अब तो गूंगा बहरा भी हैं।
जनता ने है होंठ सी लिए,
कानो पर भी पर्दा हैं।
तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
तुम ही कहो ये चीखें तुम्हारी,
किसको क्या समझाएंगी?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

Hindi Poem on women empowerment

हैं कौन यहाँ पर वीर जिसे,?
तुम दिल की पीड़ा बताओ जिसे!
हैं किस प्राणी में धैर्य जिसे,?
तुम मन की बात बताओ जिसे!
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

हैं द्रोपदी!
द्वापरयुग में,
पतियों ने शस्त्र उठाये थे।
इस कलयुग में हैं न कोई तेरा,
तुझे स्वयं ही शस्त्र उठाने हैं।

अब राम नहीं आएंगे,
पर रावण तो अब भी आएगा।
अब कृष्ण नहीं आएंगे,
पर दुर्योधन तो अब भी आएगा।

इतिहास न खुद को दोहरा पाए फ़िर!
इतिहास न खुद को दोहरा पाए फ़िर!
इसीलिए शस्त्र उठाने हैं!
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे

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