Hindi Poem on Women's empowerment

Hindi poem on women’s empowerment-महिला सशक्तिकरण पर हमारी महाकाव्य कविता का आनंद लें। महाभारत के युग से प्रेरित होकर हमने उस युग के बाद हुए परिवर्तनों को उजागर करने का प्रयास किया है।

छोड़ो आस अब शस्त्र उठा लो,
स्वयं ही अपनी लाज बचा लो।
पासे दिखाए जब हस्ता शकुनि,
मस्तक सब झुक जाएंगे।
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

Hindi Poem on women empowerment

कब तक सहारा मांगोगी तुम,
बिके हुए अखबारों से,?
केसी रक्षा माँग रहीं तुम,
दुःशासन की सरकार से?
स्वयं जो लज्जा हीन बैठे,
वे क्या लाज बचाएंगे?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

द्वापरयुग का अंधा राजा,
अब तो गूंगा बहरा भी हैं।
जनता ने है होंठ सी लिए,
कानो पर भी पर्दा हैं।
तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
तुम ही कहो ये चीखें तुम्हारी,
किसको क्या समझाएंगी?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

Hindi Poem on women empowerment

हैं कौन यहाँ पर वीर जिसे,?
तुम दिल की पीड़ा बताओ जिसे!
हैं किस प्राणी में धैर्य जिसे,?
तुम मन की बात बताओ जिसे!
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे।

हैं द्रोपदी!
द्वापरयुग में,
पतियों ने शस्त्र उठाये थे।
इस कलयुग में हैं न कोई तेरा,
तुझे स्वयं ही शस्त्र उठाने हैं।

अब राम नहीं आएंगे,
पर रावण तो अब भी आएगा।
अब कृष्ण नहीं आएंगे,
पर दुर्योधन तो अब भी आएगा।

इतिहास न खुद को दोहरा पाए फ़िर!
इतिहास न खुद को दोहरा पाए फ़िर!
इसीलिए शस्त्र उठाने हैं!
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद न आएंगे

Poem in Hindi

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1 thought on “Hindi poem on Women’s empowerment || महिला सशक्तिकरण पर कविता.”

  1. बहुत सुंदर कविता है। मन के भाव उत्पन्न कर रही है।

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