Hindi Poem on grandmother

Hindi Story With Moral | बच्चों के लिए नैतिक कहानी- नैतिक मूल्य वास्तव में मनुष्य के लिए सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं। नैतिक मूल्यों पर वास्तविक जीवन की घटना से प्रेरित इस कहानी को पढ़ें।

न्यायालय में एक केस आया ,जिसने सभी को हिला कर दिया |अदालतों में प्रॉपर्टी विवाद व अन्य पारिवारिक विवाद के केस आते ही रहते हैं| मगर ये मामला बहुत ही अलग किस्म का था।

एक 65 साल के बुजुर्ग व्यक्ति ने ,अपने 75 साल के बूढ़े भाई पर केस किया था|
केस कुछ यूं था कि “मेरा 75 साल का बड़ा भाई ,अब बूढ़ा हो चला है ,इसलिए वह खुद अपना ख्याल भी ठीक से नहीं रख सकता |मगर मेरे मना करने पर भी वह हमारी 95 साल की मां की देखभाल कर रहा है |

Poem on Grandmother in hindi
मैं अभी ठीक हूं, सक्षम हू। इसलिए अब मुझे मां की सेवा करने का मौका दिया जाय और मां को मुझे सौंप दिया जाय”। बड़े भाई ने माँ की बहुत सेवा कर ली | न्यायाधीश महोदय का दिमाग घूम गया और केस भी चर्चा में आ गया| न्यायाधीश महोदय ने दोनों भाइयों को समझाने की कोशिश की कि आप लोग 15दिन बड़ा भाई रख ले और 15 दिन छोटा भाई रख ले |

मगर कोई टस से मस नहीं हुआ,बड़े भाई का कहना था कि मैं अपने धरती के स्वर्ग को खुद से दूर क्यों होने दूँ |अगर मां कह दे कि उसको मेरे पास कोई परेशानी है या मैं उसकी देखभाल ठीक से नहीं करता, तो अवश्य आप माँ को छोटे भाई के यहाँ भेज दो ।
छोटा भाई कहता कि पिछले 35 साल से बाहर ही हूँ ,क्योंकि मेरी नौकरी बाहर ही थी |मेरे बड़े भाई अकेले ही सेवा किये जा रहे है, आखिर मैं अपना कर्तव्य कब पूरा करूँगा।जबकि आज मै स्थायी हूं,बेटा बहू सब है,तो मां भी चाहिए।
हैरान, परेशान न्यायाधीश महोदय ने हर सम्भव सभी प्रयास कर लिये ,मगर कोई समाधान नहीं निकला|

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जज महोदय को एक उपाय सुझा क्यों न माँ जी की राय ली जाय |
आखिर उन्होंने मां की राय जानने के लिए उसको बुलवाया और पूंछा कि वह किसके साथ रहना चाहती है|

माँ बहुत ही कमजोर कुल 35-40 किलो की बेहद कमजोर सी औरत थी |उसने दुखी दिल से कहा कि मेरे लिए दोनों संतान बराबर हैं| मैं किसी एक के पक्ष में फैसला सुनाकर ,दूसरे का दिल नहीं दुखा सकती|
आप न्यायाधीश हैं , निर्णय करना आपका काम है |जो आपका निर्णय होगा मैं उसको ही मान लूंगी।
और अंत में न्यायाधीश महोदय ने बड़े भारी मन से अपना निर्णय सुना दिया कि न्यायालय छोटे भाई की भावनाओं से सहमत है कि बड़ा भाई वाकई बूढ़ा और कमजोर है| ऐसे में मां की सेवा की जिम्मेदारी छोटे भाई को दी जाती है।
फैसला सुनकर बड़े भाई ने छोटे को गले लगाकर रोने लगा |
इतना सुंदर व् सुखद दृश्य देखकर अदालत में मौजूद न्यायाधीश समेत सभी लोगों के आंसू छलक पडे।

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कहने का तात्पर्य यह है कि अगर भाई बहनों में वाद विवाद हो ,तो इस स्तर का हो|
ये क्या बात है कि ‘माँ तेरी है’ की लड़ाई हो,और पता चले कि माता पिता ओल्ड एज होम में रह रहे हैं | यह पाप है।
धन दौलत गाडी बंगला सब होकर भी यदि मा बाप सुखी नही तो आपके दौलत कमाने का भी कोई फायदा नही।
निवेदन है की दोस्तों यह घटना एक सत्य घटना पर आधारित है आज भी अच्छे लोग समाप्त नहीं हुए है बल्कि ऐसे लोगो के कारण ही संसार चल रहा है |

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