Hindi romantic poem

Hindi Story || बच्चों के लिए सबसे अच्छी कहानी।

बच्चों के लिए सबसे अच्छी कहानी। प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हमारी अद्भुत हिंदी कहानियां पढ़ें। सोने के समय बच्चों के लिए इन कहानियों को पढ़ें। Hindi Story || बच्चों के लिए सबसे अच्छी कहानी।

1) Motivational Hindi Story

एक बूढे सेठ थे । वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव । आज यहाँ तो कल वहाँ।

सेठ ने एक रात को स्वप्न में देखा कि एक स्त्री उनके घर के दरवाजे से निकलकर बाहर जा रही है।

उन्होंने पूछा , ‘‘हे देवी ! आप कौन हैं ? मेरे घर में आप कब आयीं और मेरा घर छोड़कर आप क्यों और कहाँ जा रही हैं?

वह स्त्री बोली , ‘‘मैं तुम्हारे घर की वैभव लक्ष्मी हूँ । कई पीढ़ियों से मैं यहाँ निवास कर रही हूँ किंतु अब मेरा समय यहाँ पर समाप्त हो गया है इसलिए मैं यह घर छोड़कर जा रही हूँ । मैं तुम पर अत्यंत प्रसन्न हूँ क्योंकि जितना समय मैं तुम्हारे पास रही, तुमने मेरा सदुपयोग किया । संतों को घर पर आमंत्रित करके उनकी सेवा की, गरीबों को भोजन कराया, धर्मार्थ कुएँ-तालाब बनवाये, गौशाला व प्याऊ बनवायी । तुमने लोक-कल्याण के कई कार्य किये । अब जाते समय मैं तुम्हें वरदान देना चाहती हूँ । जो चाहे मुझसे माँग लो ।

Bed Time Story in Hindi

सेठ ने कहा , ‘‘मेरी चार बहुएँ है, मैं उनसे सलाह-मशवरा करके आपको बताऊँगा । आप कृपया कल रात को पधारें।”

सेठ ने चारों बहुओं की सलाह ली । उनमें से एक ने अन्न के गोदाम तो दूसरी ने सोने-चाँदी से तिजोरियाँ भरवाने के लिये कहा ।

किंतु सबसे छोटी बहू धार्मिक कुटुंब से आयी थी। बचपन से ही सत्संग में जाया करती थी । उसने कहा ,‘‘पिताजी ! लक्ष्मीजी को जाना है तो जायेंगी ही और जो भी वस्तुएँ हम उनसे माँगेंगे वे भी सदा नहीं टिकेंगी । यदि सोने-चाँदी, रुपये-पैसों के ढेर माँगेगें तो हमारी आनेवाली पीढ़ी के बच्चे अहंकार और आलस में अपना जीवन बिगाड़ देंगे। इसलिए आप लक्ष्मीजी से कहना कि वे जाना चाहती हैं तो अवश्य जायें किन्तु हमें यह वरदान दें कि हमारे घर में सज्जनों की सेवा-पूजा, हरि-कथा सदा होती रहे तथा हमारे परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम बना रहे क्योंकि परिवार में प्रेम होगा तो विपत्ति के दिन भी आसानी से कट जायेंगे।

दूसरे दिन रात को लक्ष्मीजी ने स्वप्न में आकर सेठ से पूछा , ‘‘तुमने अपनी बहुओं से सलाह-मशवरा कर लिया? क्या चाहिए तुम्हें ?

सेठ ने कहा , ‘‘ हे माँ लक्ष्मी ! आपको जाना है तो प्रसन्नता से जाइए परंतु मुझे यह वरदान दीजिए कि मेरे घर में हरि-कथा तथा संतो की सेवा होती रहे तथा परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम बना रहे।”

यह सुनकर लक्ष्मीजी चौंक गयीं और बोलीं , ‘‘यह तुमने क्या माँग लिया। जिस घर में हरि-कथा और संतों की सेवा होती हो तथा परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रीति रहे, वहाँ तो साक्षात् नारायण का निवास होता है और जहाँ नारायण रहते हैं वहाँ मैं तो उनके चरण पलोटती (दबाती)हूँ और मैं चाहकर भी उस घर को छोडकर नहीं जा सकती। यह वरदान माँगकर तुमने मुझे यहाँ रहने के लिये विवश कर दिया है।

2) Bed-Time Hindi Story

एक वकील बहुत तेज रफ़्तार पर कार चला रहा था। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी ने उसे रोका।

वकील—” क्या बात है ऑफीसर ? “
ऑफिसर—” सर, आप तेज गति से कार चला रहे थे, अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखाइए। “
वकील—” मैं आप को ड्राइविंग लाइसेंस जरूर दिखाता ऑफिसर, लेकिन मेरे पास लाइसेंस नहीं है। “
आफिसर—” तो कहाँ है ? “
वकील—” 4 साल पहले ही खो गया, जब मैं दारू पीकर गाड़ी चला रहा था। “
ऑफिसर—” ओह। तो क्या मैं आपकी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पेपर देख सकता हूँ। “
वकील—” मैं नहीं दिखा सकता। “
आफिसर—” क्यों ? “
वकील—” क्योंकि यह कार मैंने चुराई है। “
आफिसर(आश्चर्य से)—” चोरी की। “
वकील—” हाँ। कार चुराई और कार मालिक को जान से मारकर उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए। “
आफिसर—” क्या बकते हो। “
वकील—” हाँ आफिसर, कार मालिक के बॉडी पार्ट्स मैंने प्लास्टिक बैग में भरकर कार की डिकी में रखे हैं। क्या तुम डिकी देखना चाहते हो ? “

ऑफिसर ने ध्यान से वकील को देखा और धीरे धीरे पीछे हुआ और अपनी गाड़ी के पास पहुंचा और वायरलेस पर हेडक्वाटर से तुरंत बैक अप माँगा।

Quotes on Hindi Language
थोड़ी ही देर में 5 पुलिस की गाड़ियाँ पहुंची और वकील की कार को घेरे में ले लिया।
एक सीनियर आफीसर ने अपनी गन हाँथ में ली और सतर्कता से वकील की कार के पास गया और वकील को कार से बाहर निकलने को कहा।

वकील कार से बाहर आकर बोला—” कोई प्रॉब्लम है, सर ? “
आफिसर 2—” मेरे एक आफिसर का कहना है कि आपने कार चुराई है और कार मालिक का क़त्ल किया है। “
वकील—” कार मालिक का क़त्ल ? “
आफिसर 2—” क्या आप अपनी कार की डिकी खोलकर दिखाएँगे, प्लीज। “

वकील ने डिकी खोली। वो खाली थी।

आफीसर 2—” क्या ये आपकी कार है, सर ? “
वकील—” हाँ। ये देखो इसके रजिस्ट्रेशन पेपर्स। “
आफिसर 2—” मेरा एक आफिसर कहता है कि आप के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है। “

वकील ने तुरंत अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखाया।
आफिसर 2 ने लाइसेंस भी गौर से देखा और सही पाया। वो कुछ परेशान सा लगने लगा। फिर बोला।

आफिसर 2—” थैंक्यू सर। वो क्या है कि मेरे एक आफिसर ने मुझे कहा कि, आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। आपने यह कार चुराई है और आपने कार मालिक का क़त्ल कर उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए हैं। “

वकील—” मैं शर्त लगा सकता हूँ कि आपके उस झूठे आफीसर ने ये भी कहा होगा कि, मैं बहुत तेज रफ़्तार से कार चला रहा था। “

3) Hindi Story For Kids

चार साल पहले मयंक मेरे जीवन मे सुबह की पहली किरण की तरह आये। वो मेरी एक सहकर्मी के “फौजी कजिन” थे, और पहली ही मुलाक़ात में उन्होंने मुझसे कहा, एक दिन तुम Mrs Vishnoi बनोगी…. मैंने बात हँसी में टाल दी।

पर मयंक सीरियस थे। उसके बाद जब भी मिलते, वो मुझे Mrs Vishnoi ही बुलाते थे। मैं हालांकि यही कहती – तुम पागल हो… पर मैं उसकी तरफ खींची चली जा रही थी।

हम रोज़ाना, रात भर फोन पे बतियाते थे। मयंक उन दिनों इन्फेंट्री में कैप्टन थे और देहरादून में पोस्टेड थे। मैं दिल्ली में थी। वो हर शनिवार मुझसे मिलने दिल्ली आते। सिर्फ़ दो घंटे की मुलाक़ात के लिये 10 घंटे ड्राइव करते। मयंक के साथ रहना किसी स्वप्नलोक में विचरने जैसा था। कभी अचानक मेरे बर्थडे पर सरप्राइज देना तो कभी अचानक – चल नेपाल चलें। He was the king of Grand Gestures…..

Motivational Poem In Hindi

पर मयंक के साथ जुड़े रहना इतना आसान भी न था। ऐसी-ऐसी जगह ड्यूटी लग जाती जहां नेटवर्क न होता तो महीनों मुलाक़ात तो क्या बात तक न हो पाती।

एक दिन मैंने उन्हें सरप्राइज दिया। उनसे मिले दो महीने हो चुके थे। उस दिन उनका Birthday भी था। मुझे देखते ही उन्होने गले लगा लिया – बोले, तुम्हें देख लिया, बर्थडे बन गया। और फिर मेरे बर्थडे वाले दिन, सभी दोस्तों और परिवार के सामने, घुटनों पर बैठ के उंन्होने मुझे प्रपोज किया, “Mrs Vishnoi शादी करले….” और फिर चट मँगनी पट ब्याह हुआ और मैं Mrs Vishnoi बन गयी……

मुझे याद है, पंडित जी विवाह के मंत्र पढ़ रहे थे और हम फेरे ले रहे थे, तो मयंक के संकल्प निराले ही थे….. राष्ट्र प्रथम….. एक समय ऐसा भी आ सकता है जब शायद मैं लौट के न आऊं, या तिरंगे में लिपट के आऊं…… तुम एक फौजी पत्नी हो, ये हमेशा याद रखना…. जब वो ऐसी बातें करते, मैं परेशान हो जाती।

मुझे पता था मैंने किस दुनिया मे कदम रखा है। मयंक के साथ जीवन बेहद आनंददायक था। मैं उसके साथ उसकी पोस्टिंग पर गयी। हमने अपनी छोटी सी गृहस्थी बसाई। एक साल बाद वो मेजर बन गए और उनकी पोस्टिंग काश्मीर में शोपियाँ में हो गयी। ये आतंक का गढ़ था। मैं हमेशा परेशान रहती। न्यूज देखने से तो हमेशा दूर ही रहती।

मयंक मेरा ध्यान रखते। मौका निकाल के बर्थडे और सालगिरह पर भी आते। शादी को बेशक़ 4 साल हो चले थे, पर बॉर्डर पर जाते पति को गुड बाय बोलना आसान नहीं होता।

एक बार छुट्टी आये। जाने लगे तो बोले, Lets make a Family… I wanna be a Dad…. फिर उसके बाद कभी नहीं आये। सिर्फ़ उनकी ख़बर आई। “Sir के सिर में गोली लगी है…..” मेरी तो दुनिया ही उजड़ गयी। ये कैसे हो सकता है…. आज सुबह ही तो बात हुई थी….

मैं भागी-भागी श्रीनगर पहुंची…. वो कोमा में थे…
उन्हें देख मैं टूट गयी… डॉक्टर ने बताया, “He’s Brain Dead…” मैं उनसे बातें करती….. मुझे लगता ये शायद मेरे लिये ही लौट आएं….. जीवन मृत्यु का यह संघर्ष 15 दिन चला। अंत में मैंने उनसे कहा, I Love you and I’m proud of You…… Please Rest now….. और मयंक चले गए….. उनके अंतिम संस्कार में उनकी पूरी बटालियन शामिल हुई। अदम्य साहस और शौर्य के लिये उन्हें सेना मेडल मिला ।

आज उन्हें गये दो महीने हो गये। पर मुझे अब भी नहीं लगता कि वो चले गये, हमेशा के लिये । मुझे लगता है एक और पोस्टिंग हुई है…. मैं उनकी यादें संजोती हूँ। उनके करीब रहने की कोशिश करती हूँ। कभी उनकी घड़ी पहन के तो कभी उनकी वर्दी पहन के सोती हूँ….. उससे उनकी खुशबू आती है । मुझे लगता है उनसे लिपट के सोई हूँ….

अब मैं उनकी मृत्यु का शोक नही करती। मुझे उनपे गर्व होता है। मैंने उनसे सीखा कि अपने देश से और किसी व्यक्ति से टूट के प्यार कैसे किया जाता है…… Unconditional Love…

【एक फौजी पत्नी की कलम से…… मूल पोस्ट English में लिखी गयी थी। हिंदी अनुवाद किया है। ajit singh जी के फेसबुक वॉल से】

बता दें कि इसी साल सितंबर में मयंक देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए थे, टीम हिंदी पंक्तियाँ उन्हें सलाम करती है🌷🌿

जय हिंद

4) Best Hindi With Moral

आखरी बार”

मेरी नींद रोज़ सुबह अपने आप 6 बजे से पहले खुल जाती है, पुरानी आदत है, पर जब तक मैडम थीं तो एक आदत थी कि जब तक वो हमें कॉल न करतीं और हमें गुड मॉर्निंग न बोलतीं हम बिस्तर नहीं छोड़ा करते। लेटे लेटे वो शायद पांच या दस मिनट का रोज़ का इंतज़ार अपने आप में बहुत मीठा सा ज़ायका लिए हुए होता था। वो भी जानती थी कि मैं जग जाता हूँ क्यों कि पहली रिंग में ही फोन उठ जाता था और उस तरफ से रोज़ वही एक बात, ” गुड मॉर्निंग, मेरे गुड बॉय उठो, जल्दी से तैयार हो नाश्ता करो !
12 नवम्बर 2018, उसकी शादी से ठीक 5 दिन पहले, ठीक ठाक सी सर्दी थी, हम उस समय तीन बैचलर्स एक साथ रहते थे तीन कमरे के बड़े से घर में मगर मैं उस दिन उन तीन कमरों में अकेला ही था, बाकी दोनों छुट्टी लेकर घर गए हुए थे, हालांकि मेड मेरा खाना बना कर गयी थी मगर उन दिनों तो मेरी ज़िंदगी टाइम बम की तरह थी जिसकी उलटी गिनती शुरू हो चुकी थी ऐसे में खाना हलक से उतरता ही नहीं था।

रात के ग्यारह बजे थे, फ़ोन की घंटी बजी, देखा मैडम की कॉल थी, फोन उठाया और बोला “हाँ दुल्हन आंटी” वहां से तपाक से जवाब आया ” ऐ आंटी किसको बोला” और हम दोनों ठहाका लगा कर हँस दिए। “खाना खाया?” मैंने कहा “हाँ खा ही लिया”, “खा ही लिया से क्या मतलब”, यार मैं वैसे ही इतनी मुश्किल से खुद को संभाले हुई हूँ ऊपर से तुम खाना वाना छोड़ दोगे तो मेरे लिए और मुश्किल कर दोगे, चलो दस मिनट में फोन करो खा कर”।

मेरे अंदर किसी ने रॉकेट इंजन लगा दिया शायद, मैंने तुरंत खाना खाया, दसवां मिनट तब हुआ जब मैं फोन लेकर उसको मिला रहा था। पहली घंटी में ही फोन उठ गया “हम्म खा लिया”?, मैंने कहा “हम्म”, ” गुड बॉय”, जीवन में मुझे इससे पहले भी मुझे तारीफ़ मिली और इसके बाद भी, इनाम भी मिले, मगर वो जो उसके मुंह से”गुड बॉय” सुनने में जो मेरे होंठों पर मुस्कान आती थी वो फिर कभी नहीं आयी।

” तुम्हारे बिना ज़िन्दगी सोची भी नहीं थी मैंने, सोचा था किस्मत कुछ साथ देगी तो……..” उसने एक लंबी सांस छोड़ी , “खैर छोड़ो”, और बताओ क्या हाल हैं”, । ” मेरे हाल पूँछ रही हो, 6 साल दूर से सिर्फ तुमको मुस्कुराते हुए देख कर गुज़र गए, कितना अच्छा होता न कि ज़िन्दगी इस 6 साल के दायरे से बाहर ही नहीं जाती”।

ये कह कर मैं खामोश हो गया और टीवी के चैनल चेंज करने लगा हालाँकि रिमोट ले कर मैं सिर्फ बटन दबाता जा रहा था, उस पर क्या आ रहा था, उस पर ध्यान ही कहाँ था, टीवी को म्यूट किया हुआ था मैंने, सिर्फ उसकी साँसें सुन रहा था मैं, एक दम ख़ामोशी थी चारों तरफ।

पता नहीं कितनी देर ये खेल चलता रहा, मुझे लगा मैडम सो तो नहीं गयीं, मैंने हल्का सा झूठ मूठ का खाँसा, वो तुरंत बोली ” जग रही हूँ, तुमको सुन रही थी,”? “पर मैंने कुछ बोला ही कहाँ”, “तुम जब नहीं बोलते हो, तब बहुत कुछ बोलते हो, इतने सालों से यही तो रिश्ता रहा है हमारा, सुनो, ऐसे ही रहना हमेशा, कभी बदलना मत, इतने ही स्वीट, इतने ही इनोसेंट, तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी तुम्हारे अंदर जो दिल है वो एक दम बच्चों जैसा है, उसको इतना ही साफ़ रखना, ज़िन्दगी की किसी भी कड़वाहट को इसमें मत भरना”।

“क्या हुआ सो गए क्या”? उसने धीमे से पूँछा, “नहीं, अपनी तारीफ़ सुन रहा था, जाने तुमको क्या क्या गलत फहमी है, मैं और स्वीट, इनोसेंट? मेरे अंदर दुनिया भर के प्रेम चोपड़ा और अमरीश पुरी भरे हुए हैं, तुमने कभी मौका ही नहीं दिया” हम दोनों फिर से एक साथ हँसने लगे।

रात में टीवी पर पुराने गाने आते हैं, मैंने उस ही चैनल पर रोक दिया, और हल्की सी आवाज़ खोल दी, वो बोली ” लेटे नहीं हो क्या, टीवी देख रहे हो?” मैंने कहा “पता नहीं अब कितने घंटों का साथ है तुम्हारा, जग लेने दो हर पल में मुझे, देख लेने दो वो पल भी जहाँ यकीन हो मुझे कि तुम अब मेरी नहीं हो”।

तभी गाना टीवी पर आ गया “लग जा गले कि फिर ये हंसीं रात हो न हो, शायद फिर इस जन्म में मुलाक़ात हो न हो”। ये सुनकर पता नहीं क्या हुआ मुझे कुछ अजीब सा लगा, मैंने ध्यान से सुना, तो बहुत दबी हुई सिसकी सुनी उसकी, मैंने गंभीरता से उसका नाम लिया, उसने कोई जवाब नहीं दिया मगर सिसकी बढ़ती गयी, मैंने फिर पुकारा उसका नाम, वो थोड़ा सा अपने आंसुओं को संभालते हुए रुंधे गले से बोली ” इतने सालों से तुमको देख कर सिर्फ हँसना जाना है मैंने, आज रो लेने दो मुझे जी भर कर, क्या पता तुम मुझे फिर कभी रोने के लिए भी नसीब न हो”।

उसकी बात का मेरे पास कोई जवाब ही नहीं था, अगर कुछ था तो मेरी भी आँखों के किनारों का गीलापन था, मैंने टीवी बंद की, और वहीँ बैठा रहा थोड़ी देर, न उसने कुछ कहा और न मैंने, उस समय यूँ लगा जैसे दुनिया में सिर्फ हम दोनों ही थे और बाकी सब शून्य था।

उस समय मैं उसकी धड़कन पहचान रहा था, क्योंकि उस ही धड़कन के साथ मेरा भी दिल धड़क रहा था, बिछड़ने का दर्द था उसमे, मैंने चुप रहना उस समय बेहतर समझा और अपनी आँखें मैंने जैसे ही बंद की ऐसा बाँध टूटा उनमे से कि जाने कितने साल के आँसू थे जो रोक के रखे थे, शायद इस ही दिन के लिए। कॉल कट गयी, पता नहीं क्या हुआ, मुझे पलट कर कॉल करने की हिम्मत भी नहीं हुई।

मैंने मोबाइल कुर्ते के जेब में रखा और मुंह धोया, फिर रसोई में गया और चाय बनाने लगा। पता नहीं इस समय उसको देखने की हुड़क बहुत तेज़ हो गयी, 6 साल तक उसकी मुस्कराहट तो रोज़ देखी मगर उसका एक भी आँसू नहीं देखा, यही वजह थी कि उसको एक बार मैं अपने नाम पर रोते हुए देखना चाहता था।

इतने में मेरा मोबाइल बजा, मैंने जैसे ही उठाया उधर से आवाज़ आयी ” मुझे माफ़ कर देना, मैं अपने माँ बाप की वजह से ये शादी कर रही हूँ, तुमको तो पता ही है सब्”, मैंने जवाब दिया “पागल हो क्या इसमें माफ़ी कहाँ से आ गयी, तुमने जो किया उस पर गर्व है मुझे, अगर तुम ऐसा नहीं करतीं तो मुझे अफ़सोस होता, माँ बाप से बढ़ कर कुछ है ही नहीं इस दुनिया में”।

वो थोड़ा शांत हो कर बोली, “सुनो, एक बात के लिए माफ़ कर पाओगे मुझे”, ” क्या बात है बोलो?”, मैं कंधे और सर के बीच में मोबाइल एक साइड में दबा कर चाय छानते हुए बोला, ” क्या मुझे इजाज़त दोगे कि आज के बाद मैं तुम्हे कभी फोन न करूँ”? इतना सुनते ही मेरे पाँव तले जमीन खिसक गयी, यूँ लगा जैसे कोई कह रहा हो कि अपना वजूद भूल जाओ, मेरे माथे पर पसीना आ गया एक दम, धड़कन तेज़ हो गयी, “क्या हुआ कुछ बोलो न?” “हम्म, क्या बोलूँ तुमने तो सीधे साँसें ही मांग लीं, बड़ा महंगा गिफ्ट ले रही हो अपनी शादी का मुझसे” अपना थूक गटकते हुए मैंने उसको बोला “जैसा तुमको ठीक लगे”।

इतने में उसके दरवाज़े पर किसी ने खटखटाया, वो एक मिनट का बोल के चली गयी, मैं कांपते हाथ से मोबाइल पकडे हुए था, क्यों की अंतिम लम्हा आने वाला था। वो वापस आ कर लेट गयी, फोन उठाकर बोली, ” जाने का टाइम हो गया, आज पहली बार मुझे ये लग रहा है कि जाने तुमसे कितना कुछ कहना बाकी रह गया है और न जाने कितना तुमसे सुनना बाकी रह गया है”।

Moral Stories In Hindi Short

और ये सही भी था, 6 घंटे की उस कॉल में न तो उसके पास ज्यादा कुछ था कहने को और न ही मेरे पास, मगर उस दिन न उसकी बात ख़त्म हुई और न ही मेरी। वो मेरा नाम ले कर बोली लव यू, और मैं रुंधे गले से लव यू टू बोल कर सर से पाँव तक कांपने लगा, अब…अब … अब, ये अंत का इंतज़ार बहुत बुरा था, न उसकी हिम्मत फोन काटने की हुई और न ही मेरी, मैं फोन को लेकर बालकनी में आया, 13 नवम्बर सुबह पांच बज कर दो मिनट पर मैंने खुद ही फोन काट दिया, सामने से सूरज निकल रहा था, उस दिन फिर मेरी सुबह उसके साथ हुई थी मगर शायद………
आखरी बार::::::::

Story in Hindiआपके विचार हमारे लिए अनमोल हैं। कृपया बेझिझक हमें कमेंट सेक्शन में कहानी पर अपने विचार या प्रतिक्रियाएँ बताएं।
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