Moral story in Hindi

नैतिक कहानी – नैतिक मूल्य न केवल अच्छे हैं बल्कि वे प्रत्येक मनुष्य के लिए आवश्यक हैं। इस कहानी को पढ़ें और अपने जीवन में नैतिक मूल्यों के महत्व का अंदाजा लगाएं|| Moral Story in Hindi

बंटवारा

जगेश बाबू का कभी अपना जलवा था। रौबिले और गठिले जिस्म पर सफेद कुर्ता-धोती मारवाड़ी पगड़ी खूब फबती। हाथ में छड़ी और मुंह में पान की गिलौरी दबाए ताव से मूंछों पर हाथ भांजते रहते। शहर से गांव आते तो उनकी जेब में सूंघनी की डिब्बी और गमकौवा इत्र पड़ा रहता। जग्ग्न महतो गांव आते ही जगेश बाबू से तगादा ठोंक देते।

” कारे जगेशवा” ! इतना ठेका सुनते ही जगेश बाबू जग्गन महतो का इशारा समझ जाते और तपाक से बोल उठते “पांय लांगू काका। हां ! जी ! हम लिफाफा देख खत का मजमून पढ़ लेते हैं। आव काका इहवां बैठ। हमरा का मजाल काका और उनकी सूंघनी भूलाय जाऊँ ” । जवाब में जग्गन काका की ओर से मिले एक ठहाके से महौल हंसी ठिठोली में बदल जाता।

जगेश बाबू जब शहर से गांव आते तो एक दिन थकान मिटाने के बाद दूसरे दिन हाथ में छड़ी लिए गांव-जवार का कुशल छेम पूंछने निकल जाते। बड़े बुजुर्गों का बेहद सम्मान करते और उनका आशीर्वाद लेते। किसी को कोई जरुरत होती तो उसे उपलब्ध भी कराते। बच्चों से खूब जमती। दशहरे के मेले में आस पड़ोस के सभी बाल-गोपाल को बुलाकर मेला देखने के लिए रुपइया देते। उस दौर में जगेश बाबू की धर्मपत्नी लाडो काकी का अपना जमाना था।

Moral story in hindi

महिलाओं में उनकी खूब चलती थी। तीन बेटों को जेगेश बाबू ने पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया दिया था। सभी शहर के सरकारी विभागों में अफसर थे। लेकिन समय जाते देर नहीं लगती। वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है। कुछ शेष बचते हैं तो बिताएं पल और यादें।

एक दिन अचानक जगेश बाबू को दिल का दौरा आया और वे दुनिया छोड़ गए । बेटे और बहुएं रस्म बीतने के बाद अपने- अपने बाल बच्चों के साथ शहर चले गए। घर में अकेली लाडो काकी रह गई। पति की मौत और बेटों की बेरुखी के साथ काकी सूख कर लकड़ी हो चली। गांव में अकेली रहने लगी थीं। कोई उनकी पूछ नहीं रखता था। कभी रुखी- सूखी पकाती या पड़ोसियों के घर से जो मिल जाता उसी से काम चला लेती। क्योंकि उनके जिस्म में अब दम नहीं रह गया था। पूरे अस्सी की उम्र पार कर चुकीं थीं। जिसकी वजह से भूखों सोना पड़ता।

लाडो काकी की दशा देख गांव जवार में अफसर बेटों की जगहंसाई हो रही थी। लोग ऐसे बेटों पर थू- थू करते। यह भी कहते कि ऐसी संतान से बेऔलाद भले। आखिर ओ दिन आ गए जब मां की दुर्दशा और समाज में गिरती साख को देख तीनों बेटे लाडो काकी को अपने साथ शहर ले जाने के लिए गांव पहुंचे।

जगेश काका के तीनों अफसर बेटों के गांव आने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। पड़ोस की औरतें और मर्द मुंहामुंह करने लगे।चलो देर से ही सही कम से कम मां-बाप के कर्ज उताने की चिंता तो हुई। भगवान ने मति तो फेरी। महिलाएं आपस में खुसर फुसर कर रही थी कि वह दौर भी था जब बुढ़िया बेचारी के पैर का महावर नहीं छूटता था। दांतों में मिसी चमकती रहती थी। पूरा शरीर गहनों से भरा होता था। जगेश काका के साथ काकी भी मचिया पर बैठ पान का बीड़ा दवाए रहती। लेकिन सब वक्त-वक्त की बात है। हे राम! यह बुढ़ौती चाहे जो करवाए। लेकिन चलो देर आए दुरुस्त आए। सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। गांव वाले आपस में चर्चा कर रहे थे।

Poem on Grandmother in hindi
गांव वालों को भरोसा था कि लाडो काकी सुबह शहर चली जाएंगी सो महिलाएं और गांव के बड़े बुजुर्ग उनसे मिलने आ रहे थे। लोगों की आखों में आंसू थे। गांव के लोग घर आए जगेश बाबू के तीनों अफसर बेटों का कुशल क्षेम पूछ रहे थे। पद हद में जो जैसा था वैसा व्यहार किया जा रहा था। गुनगुनी ठंड का मौसम था। शाम ढ़लने के कुछ देर बाद गांव में अंधेरा छा गया था। पड़ोसी अपने-अपने घर को चले गए थे। बस जगेश बाबू के तीनों बेटे और बहूएं बरामदे में आपस में लाडो काकी को लेकर बातचीत कर रहे थे।


जगेश बाबू का बड़ा बेटा रघुनाथ किसी थाने में दीवान था। उसकी पत्नी अंबिका सरकारी स्कूल में टीचर
थीं। रघुनाथ बाबू अपनी पत्नी से कहा ” मां को कुछ दिन हम अपने पास रखते हैं”।
पति की बात सुन अंबिका को जैसे शांप सूंघ गया। उसके जिस्म का सारा खून जम गया। पल भर के लिए ऐसा लगा जैसे वह बर्फ में स्नान कर निकली हो। थोड़ी देर बाद उसने कहा।
“अजी चुप रहो ! आप मां की भक्ति में जिंदगी का सूख-चैन क्यों हराम करने में लगे हैं। घर की बड़ी बहू होने के नाते हमने काफी दिनों तक बुढ़िया की सेवा की है। क्या दिया इस कलमुंही ने। जवानी में तो यह सास नहीं पूरी डायन थी। कभी फूटी कौड़ी देने और झूठी प्रशंसा के बजाय बाबू जी से मेरी शिकायत करती फिरती। मैं जब खाना पकाती उसमें कुछ न कुछ मीनमेख निकाला करती”। अंबिका ने अपने पति रघुनाथ का जबाब देते हुए यह बात कहीं। पत्नी का ऐसा तेवर देख रघुनाथ बाबू ने मौन धारण कर लिया।

Moral story
” देखो! मां हैं। उसने नौ माह तक अपनी कोख में मुझे रखा है। हम उस कर्ज से अदा नहीं हो सकते। मां का अपमान अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। कहने को हम तीन बेटे हैं, लेकिन फिर बेटों के होने का मतलब क्या है। गांव वाले हमारे परिवार पर फब्तियां कस रहे हैं। जवार में शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। समाज में पिताजी का बड़ा नाम था। हम पांच बच्चों को पाल सकते हैं। उन्हें पढ़ा लिखा सकते हैं फिर एक मां को क्यों नहीं रख सकते। चलो ! कोई न रखे, मां को हम अपने पास रखते हैं”। जगेश बाबू के दूसरे बेटे श्याममोहन ने अपनी पत्नी रुक्मिणी से कहा
” वाह! रे श्रवण कुमार। सारा माल तो जेठानी मस्टराइन ने निगल लिया। मोटा वाला हार, सोने की सिगड़ी और नाक की बेसर भी। इस बुढ़िया ने हमें क्या दिया। फिर बड़े आए हो मां के भक्त। जुबान मत खोलिएगा। हम इस मामले में समझौता करने वाली नहीं हूं। इस गले जिस्म को लेकर क्या…”


दूसरी बहू रुक्मिणी जो शहर में पार्लर चलाती थी। उसने यह बात अपने पति से कहा था। श्याममोहन भी आ बैल मार की स्थित देख मौन रहना ही बेहतर समझा।
“…तो तुम हरिश्चंद्र हो। जाओ-जाओ अपनी मां को लेकर रहो। आज से मुझसे इस विषय में बात मत करना। बुढ़िया ने तो हमें पैर बिछुआ तक नहीं दिए। कर्णफूल तो बड़ी चीज है। हमतो सबसे छोटी बहू हूं और तीसरे पर हूं। सारा माल तो दोनों जेठानियों ने रख लिया। फिर इस लाश को पालपोष कर मैं क्या करुंगी। कान खोल कर सुन लीजिए! इस विषय पर मुझसे कभी बात मत करिएगा”।

Hindi Poem on grandmother


यह बात जगेश बाबू की तीसरी बहू अरविंद कि धर्मपत्नी उर्मिला ने कहीं। अरविंद नगर निगम में बड़े बाबू के पद पर तैनात थे जबकि उर्मिला रेलवे में क्लर्क है।
अब काफी रात गुजर चुकी थी। बेटों और बहुओं की बात सुन लाडो काकी का कलेजा चाक हो गया था। दिल की धड़कने बढ़ गई थी। वह जगेश बाबू की यादों में खो गई। जगेश बाबू की बनाई हर विरासत तीन हिस्सों में बंट गई थी। लेकिन मां किसके हिस्से में जाएगी यह फैसला अभी तक नहीं हो सका था।

कुछ देर बाद घर के कमरों की लाइटें बुझ गयी थी। अब कोई आवाज नहीं आ रही थी। रात्रि का संन्नाटा और गहराता जा रहा था। ठंड बढ़ने लगी थी। गांव में कुत्तों का झुंड भौंक रहा था। लाडो काकी गहरी सोच में डूब गई थीं। वह हांडमांस की ऐसी निरर्थक वस्तु बन कर रह गयी थी। जिनका बेटे और बहुओं की निगाह में न कोई मूल्य रहा न बंटवारा।

Story in Hindi

आपके विचार हमारे लिए अनमोल हैं। कृपया बेझिझक हमें कमेंट सेक्शन में कहानी पर अपने विचार या प्रतिक्रियाएँ बताएं।
आप हमसे यहाँ भी संपर्क कर सकते हैं-हमसे संपर्क करें

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *