Poem on Caste Discrimination In Hindi

Poem on Caste Discrimination In Hindi | जातिगत भेदभाव पर कविता – आज की दुनिया में भी, हमारे समाज में अभी भी जातिगत भेदभाव जैसी बुराइयाँ हैं। जातिगत भेदभाव पर हमारी महाकाव्य कविता पढ़ें और इस बुराई का विचार प्राप्त करें।

दलितों का समाज
हाँ समाज है
अरे! हाँ समाज है
जब ही तो वे अलग है
खुशियों मे बुलाते सब ही
उन्हें, पर खुश रहने का हक नही
उन्हें भी बनाया रब ने ही
इस दुनिया का हिस्सा, पर
उनकी दुनिया ही अलग बना दी
जी, हाँ समाज है
तुम पैदा होते उस महोल्ल मे बचपन से सहे होते तान्ने इस समाज मे
अलग मिलता खाना
अलग मिलती किताब
नही बैठने देते साथ मे
मिलता एक कोना हर हाल मे
भेदभाव होता, खेलने मे
खाने मे, बोलने मे
पढने मे, ओर तो नाम लेने मे
सहना होता हर सित्म इस समाज मे
जी, हाँ समाज है
भेदभाव का टोकरा है।

Story in Hindi

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